वन विभाग ने 116 साल बाद दुर्लभ तितली यूरेमा एंडरसोनी को देखे जाने का दावा किया है। विभाग के सर्वे से प्राप्त तस्वीर का विशेषज्ञों ने बारीकी से अवलोकन करने पर पाया कि इनमें से एक तस्वीर ‘वन स्पाट ग्रास यलो यूरेमा एंडरसन’ नामक तितली की है।
अधिकारियों के मुताबिक यह तितली ‘पिरीडिया’ कुल प्रजाति की है, जो भारत के सिक्किम, अरुणाचल, उत्तर पूर्वी हिमालय क्षेत्र में पाई जाती है। कुमाऊं वन विभाग के मुख्य संरक्षक परमजीत सिंह ने सितंबर से कुमाऊं में पाई जाने वाली तितलियों की वर्तमान पारिस्थितिकी का पता लगाने के लिए सर्वे कराया।
विशेषज्ञों के मुताबिक उत्तराखंड में इस प्रजाति की केवल एक तितली को अंतिम बार 1899 में मसूरी (गढ़वाल) में देखे जाने का रिकार्ड दर्ज है। वन विभाग के सांख्यिकी अधिकारी शंकर कुमार ने इस तितली की तस्वीर को अल्मोड़ा जिले के जागेश्वर रेंज में 11 अप्रैल 2015 को करीब 2200 मीटर की ऊंचाई पर कैमरे में कैद किया।
इसके अलावा हाल ही में बागेश्वर जिले में दो दुर्लभ तितलियां कश्मीर फोर रिंग और तजुरिया याजना को भी खोजा गया था।
अधिकारियों के मुताबिक यह तितली ‘पिरीडिया’ कुल प्रजाति की है, जो भारत के सिक्किम, अरुणाचल, उत्तर पूर्वी हिमालय क्षेत्र में पाई जाती है। कुमाऊं वन विभाग के मुख्य संरक्षक परमजीत सिंह ने सितंबर से कुमाऊं में पाई जाने वाली तितलियों की वर्तमान पारिस्थितिकी का पता लगाने के लिए सर्वे कराया।
विशेषज्ञों के मुताबिक उत्तराखंड में इस प्रजाति की केवल एक तितली को अंतिम बार 1899 में मसूरी (गढ़वाल) में देखे जाने का रिकार्ड दर्ज है। वन विभाग के सांख्यिकी अधिकारी शंकर कुमार ने इस तितली की तस्वीर को अल्मोड़ा जिले के जागेश्वर रेंज में 11 अप्रैल 2015 को करीब 2200 मीटर की ऊंचाई पर कैमरे में कैद किया।
इसके अलावा हाल ही में बागेश्वर जिले में दो दुर्लभ तितलियां कश्मीर फोर रिंग और तजुरिया याजना को भी खोजा गया था।

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