मंगलवार 21 अप्रैल को गूगल अपने मोबाइल सर्च ऐल्गॉरिथम में एक बड़ा बदलाव करने जा रही है, जिसके बाद यूजर्स द्वारा सर्च करने के आधार पर वेबसाइट्स को रैंकिंग देने का तरीका बदल जाएगा। यानी कई सारी ऐसी महत्वपूर्ण वेबसाइट्स हैं जो सिर्फ इसलिए सर्च में पीछे चली जाएंगी, क्योंकि वे मोबाइल फोन पर रीडेबल नहीं हैं। इसमें कई सारी सरकारी वेबसाइट्स भी शामिल हैं जो मोबाइल यूजर्स के मुताबिक कस्टमाइज्ड नहीं हैं।
गूगल का यह नया ऐल्गॉरिथम मोबाइल फ्रेंडली वेबसाइट्स को फेवर करेगा और सर्च में ऊंची रैंकिंग देगा। मोबाइल फ्रेंडली वेबसाइट यानी बड़े टेक्स्ट, ईजी टु क्लिक लिंक्स और स्क्रीन पर फिट होने वाली वेबसाइट्स। जो वेबसाइट्स मोबाइल फ्रेंडली नहीं हैं, उन्हें डिमोट कर दिया जाएगा।
इसका असर यह होगा कि काफी सारा कॉन्टेंट सिर्फ इसलिए पीछे के पेजों पर चला जाएगा क्योंकि वह मोबाइल पर पढ़ने में दिक्कत होती है। रेलिवेंसी के साथ-साथ अब रीडेबिलिटी भी कॉन्टेंट सर्च का महत्वपूर्ण पैमाना होगा।
ऑनलाइन ट्रैफिक का 60% मोबाइल्स से ही आ रहा है और गूगल चाहती है कि मोबाइल लिंक्स क्लिक करने पर यूजर्स को अच्छा एक्सपीरियंस मिले।
कम्पनी ने फरवरी में इन बदलावों का ऐलान किया था। ताकि वेबमास्टर्स को अपनी वेबसाइट्स गायब होने से बचाने के लिए जरूरी कदम उठाने का पर्याप्त समय मिल सके। लेकिन अब भी इस बदलाव के परिणामों से रैंकिंग का पूरा ढांचा हिल जाने की उम्मीद है। बिजनस इनसाइडर को डूडा नाम की वेबसाइट बिल्डिंग कम्पनी के सीईओ इतई सादान ने बताया कि इसका निकनेम भी 'मोबाइल गेडन' रखा गया है क्योंकि करोड़ों वेबसाइट्स के लिए यह हानिकारक होगा।
माना जा रहा है कि इससे वे सभी लोग रिस्क पर हैं जिन्हें इसके बारे में नहीं पता और इनमें से अधिकतर छोटे बिजनस हैं।
सादान ने कहा, '21 अप्रैल को, कई सारे छोटे बिजनस इस बात से हैरान परेशान होंगे कि उनके विजिटर अचानक इतने कम कैसे हो गए हैं। इससे वेब पर मौजूद करोड़ों साइट्स प्रभावित होंगी।'
ऐसे बिजनस जो लोकलाइज़्ड सर्च के जरिये ढूंढे जाने पर निर्भर हैं, उनमें फुट ट्रैफिक कम हो जाएगा।
सादान ने कहा, 'गूगल हमेशा रेलिवेंसी पर चला है और यहां कॉन्टेंट राजा है। लेकिन यह बदल रहा है। हां, कॉन्टेंट अभी भी काफी महत्वपूर्ण है लेकिन एक्सपीरियंस का भी उतना ही महत्व है। सिर्फ सही कॉन्टेंट होना काफी नहीं है। अगर लोग आपकी साइट पर आ रहे हैं और कॉन्टेंट मौजूद होने के बावजूद रीडेबल नहीं है, तो यह अच्छा नहीं है।'
हालांकि, ऐसा भी नहीं है कि सिर्फ छोटे बिजनस ही मोबाइल गेडन से प्रभावित होंगे।
मार्केटिंग कम्पनी सोमो ने पिछले हफ्ते एक स्टडी रिलीज की है जिसमें बड़े ब्रैंड्स जैसे, अमेरिकन अपेरल, द डेली मेल, रयानेयर पर भी इस बदलाव का काफी प्रभाव पड़ेगा बशर्ते वे अपनी साइट्स पर बदलाव ले आएं।
गूगल का यह नया ऐल्गॉरिथम मोबाइल फ्रेंडली वेबसाइट्स को फेवर करेगा और सर्च में ऊंची रैंकिंग देगा। मोबाइल फ्रेंडली वेबसाइट यानी बड़े टेक्स्ट, ईजी टु क्लिक लिंक्स और स्क्रीन पर फिट होने वाली वेबसाइट्स। जो वेबसाइट्स मोबाइल फ्रेंडली नहीं हैं, उन्हें डिमोट कर दिया जाएगा।
इसका असर यह होगा कि काफी सारा कॉन्टेंट सिर्फ इसलिए पीछे के पेजों पर चला जाएगा क्योंकि वह मोबाइल पर पढ़ने में दिक्कत होती है। रेलिवेंसी के साथ-साथ अब रीडेबिलिटी भी कॉन्टेंट सर्च का महत्वपूर्ण पैमाना होगा।
ऑनलाइन ट्रैफिक का 60% मोबाइल्स से ही आ रहा है और गूगल चाहती है कि मोबाइल लिंक्स क्लिक करने पर यूजर्स को अच्छा एक्सपीरियंस मिले।
कम्पनी ने फरवरी में इन बदलावों का ऐलान किया था। ताकि वेबमास्टर्स को अपनी वेबसाइट्स गायब होने से बचाने के लिए जरूरी कदम उठाने का पर्याप्त समय मिल सके। लेकिन अब भी इस बदलाव के परिणामों से रैंकिंग का पूरा ढांचा हिल जाने की उम्मीद है। बिजनस इनसाइडर को डूडा नाम की वेबसाइट बिल्डिंग कम्पनी के सीईओ इतई सादान ने बताया कि इसका निकनेम भी 'मोबाइल गेडन' रखा गया है क्योंकि करोड़ों वेबसाइट्स के लिए यह हानिकारक होगा।
माना जा रहा है कि इससे वे सभी लोग रिस्क पर हैं जिन्हें इसके बारे में नहीं पता और इनमें से अधिकतर छोटे बिजनस हैं।
सादान ने कहा, '21 अप्रैल को, कई सारे छोटे बिजनस इस बात से हैरान परेशान होंगे कि उनके विजिटर अचानक इतने कम कैसे हो गए हैं। इससे वेब पर मौजूद करोड़ों साइट्स प्रभावित होंगी।'
ऐसे बिजनस जो लोकलाइज़्ड सर्च के जरिये ढूंढे जाने पर निर्भर हैं, उनमें फुट ट्रैफिक कम हो जाएगा।
सादान ने कहा, 'गूगल हमेशा रेलिवेंसी पर चला है और यहां कॉन्टेंट राजा है। लेकिन यह बदल रहा है। हां, कॉन्टेंट अभी भी काफी महत्वपूर्ण है लेकिन एक्सपीरियंस का भी उतना ही महत्व है। सिर्फ सही कॉन्टेंट होना काफी नहीं है। अगर लोग आपकी साइट पर आ रहे हैं और कॉन्टेंट मौजूद होने के बावजूद रीडेबल नहीं है, तो यह अच्छा नहीं है।'
हालांकि, ऐसा भी नहीं है कि सिर्फ छोटे बिजनस ही मोबाइल गेडन से प्रभावित होंगे।
मार्केटिंग कम्पनी सोमो ने पिछले हफ्ते एक स्टडी रिलीज की है जिसमें बड़े ब्रैंड्स जैसे, अमेरिकन अपेरल, द डेली मेल, रयानेयर पर भी इस बदलाव का काफी प्रभाव पड़ेगा बशर्ते वे अपनी साइट्स पर बदलाव ले आएं।

No comments:
Post a Comment