गढ़वाल राइफल्स के रणबांकुरों की प्रथम विश्व युद्ध में लिखी गई शौर्यगाथा की याद दिलाने वाली प्रतिमा प्रस्ताव के बाद भी बेशक फ्रांस में नहीं लग पाई अलबत्ता, उसकी प्रतिकृति 88 साल बाद वहां पहुंच गई।
वह भी भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जरिये। मोदी ने अपनी फ्रांस यात्रा में राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद को गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंट के वीर सैनिकों के प्रतीक कांसे की प्रतिमा की प्रतिमूर्ति भेंट की है। इससे गढ़वाल राइफल्स के सैनिकों में काफी उत्साह है।
दरअसल प्रथम विश्व युद्ध के शहीदों की शहादत को चिरस्थायी बनाने के लिए गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंट के केंद्र लैंसडौन में एक युद्ध स्मारक बनाया गया है। इसका निर्माण चेल्सिया ब्रिटेन के एलएस मेरीफील्ड ने किया।
वह भी भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जरिये। मोदी ने अपनी फ्रांस यात्रा में राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद को गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंट के वीर सैनिकों के प्रतीक कांसे की प्रतिमा की प्रतिमूर्ति भेंट की है। इससे गढ़वाल राइफल्स के सैनिकों में काफी उत्साह है।
दरअसल प्रथम विश्व युद्ध के शहीदों की शहादत को चिरस्थायी बनाने के लिए गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंट के केंद्र लैंसडौन में एक युद्ध स्मारक बनाया गया है। इसका निर्माण चेल्सिया ब्रिटेन के एलएस मेरीफील्ड ने किया।

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