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उत्तराखंड: 53 हजार युवाओं के सुनहरे सपनों पर ग्रहण


उत्तराखंड अधीनस्थ सिविल न्यायालय लिपिक वर्गीय सेवा की लिखित परीक्षा के परिणाम पर सवाल खड़े हो गए हैं। इसमें नौ प्रश्नों के दो-दो उत्तर सही मानते हुए रिजल्ट तैयार किया गया है। जबकि आठ प्रश्नों की कामन मार्किंग की गई।

53 हजार ने दी थी परीक्षा
बीती आठ फरवरी को उत्तराखंड प्राविधिक शिक्षा परिषद रुड़की की ओर से आयोजित इस परीक्षा में करीब 53 हजार युवा शामिल हुए थे। दो घंटे में 140 सवाल हल करने थे। परीक्षा परिणाम 10 अप्रैल को घोषित किया गया था।


अभ्यर्थियों ने सूचना के अधिकार के जरिए परिषद से प्रश्नपत्र के सेट-ए की उत्तरमाला मांगी। जिसे देख अभ्यर्थियों का सिर चकरा गया। हरिद्वार से अभ्यर्थी अखिल कुमार, अमित जोशी और ममता आदि का कहना है कि नौ प्रश्नों के दो-दो उत्तर सही माने गए हैं।

वहीं आठ प्रश्नों को या उनके उत्तरों के सभी विकल्प गलत माने गए। इनके लिए सभी को समान अंक दे दिए गए। अभ्यर्थियों का कहना है कि जहां चयन के लिए एक चौथाई नंबर के लिए कंप्टीशन हो रहा हो वहां 17 प्रश्नों ने तो पूरा रिजल्ट ही बदल दिया है अतएव मामले की जांच होनी चाहिए।


ए सेट की उत्तरमाला में प्रश्न-19 एवं 21 के उत्तर में सी एवं डी दोनों विकल्प सही बताए गए हैं। 42 के ए एवं सी विकल्प, 53 के ए एवं डी, 60 एवं 94 के ए एवं बी, 122 के बी और सी, 137 के सी और डी तथा प्रश्न संख्या 139 के भी दो विकल्प बी एवं डी सही उत्तर माने गए हैं।

कृष्णा कोचिंग सेंटर में सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ रविंद्र कुमार का कहना है कि प्रश्न-21 में पूछा गया है कि ‘राज्य विधानसभा में किसके लिए आरक्षण की व्यवस्था नहीं है’। इसमें डी विकल्प में पिछड़ा वर्ग लिखा गया है, जो सही है।

लेकिन उत्तरमाला में डी के साथ सी को भी सही माना गया। सी में एंग्लो इंडियन समुदाय लिखा है। जबकि उनके लिए आरक्षण है और एक सदस्य मौजूद है।


इनके लिए कॉमन मार्किंग
परिषद की ओर से उपलब्ध कराई गई आंसर की में प्रश्न-52, 63, 97, 103, 113, 116, 131 और� 138 के लिए कामन मार्किंग की गई है। यानी इनका किसी ने कोई भी उत्तर लिखा हो, उसे बराबर अंक दिए गए।

इनका है कहना
उत्तरमाला पर आपत्तियां मांगी जाती हैं। उन्हें विशेषज्ञों के पास भेजा जाता है। अलग-अलग विशेषज्ञों ने किन्हीं प्रश्नों के दो उत्तर सही माने होंगे तो दोनों पर अभ्यर्थियों को नंबर दिए गए। वैसे मेरे सामने उत्तरमाला नहीं है। केस को देखने के बाद कुछ कहा जा सकता है।
-हरी सिंह, सचिव उत्तराखंड प्राविधिक शिक्षा परिषद।


1 comment:

  1. rti lagane se kuch nahi hoga go to high court and case file them

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